Jatyadi Oil Benefits, Composition in Hindi – जत्यादी तेल

Jatyadi Oil ek Auyrvedic tel hai jiska use infection, injury hone par kiya jata hai. Janiye iske health benefits in Hindi, composition aur hone wale side-effects ke bare mein. यह Jatyadi Oil का उपयोग फोड़े फुंसियों, चोट लगने, बवासीर इत्यादि के लिए किया जाता है | इसके अलावे जात्यदी के तेल को किस-किस बीमारी में उपयोग किया जाता है, यह जानने के लिए आप नीचे पढ़े । निचे आपको इस तेल के बारे में कई तरह की information दिए गए है । इसमें आपको इस तेल का uses से लेकर side effect तक के बारे में बताया गया है ।

Jatyadi Oil



Jatyadi Oil एक तरह का ayurvadic तेल होता है जिसे फफोले, साइनस, गैर चिकित्सा घाव, face पर हुए फोड़े फुंसी, आदि कई रोग में इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है । ये तेल liquid form में आता है। इस तेल को केवल external use के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है । इस तेल को Sandu और Baidyanath in दोनों companies द्वारा निर्मित किया जाता है । वैसे तो इसके निर्माण की तारीख से 3 साल तक इसका उपयोग किया जा सकता है लेकिन एक बार जब इसका सील खुल जाए तो एक वर्ष के भीतर इसका उपयोग कर लेना बेहतर होता है। आइये अब इस तेल के बारे में और भी जानकारियां हासिल करते है ।

Composition

इसमें कई तरह के सामग्रियों के मिश्रण से बनाया गया है । Jatyadi Oil में शामिल किये गए कुछ content / सामग्रियों के नाम नीचे बताये गए है:



  • चमेली के पत्ते
  • नीम के पत्ते
  • पटोल पत्र
  • करंज के पत्ते और बीज
  • मोम , नीला थोथा
  • हल्दी, नीलकमल
  • कुटकी , मुलहठी
  • मजीठ, कूठ , आदि ।

Uses of Jatyadi Oil in Hindi

इसके कई company बनाती हैं जैसे Jiva, Patanjali इत्यादि, आइये जानते है Jatyadi in Hindi और इस तेल का इस्तेमाल जिन जिन बीमारियों और लक्षणों को ठीक करने में किया जाता है उनके बारे में निचे बताया गया है ।

  • इस तेल का इस्तेमाल त्वचा पर हुए फोड़े फुंसियों को ठीक करने के लिए किया जाता है ।
  • skin पर मकड़ी के रगड़ा जाने पर इस तेल का use किया जाता है ।
  • चमड़ी छिल जाने से जो घाव होता है उसे भी ठीक करने के लिए इस तेल का use किया जाता है ।
  • किसी भी प्रकार का अन्दरूनी चोट लगने पर इस तेल को लगाया जाता है ।
  • किसी चीज से कटने पर जो घाव हो जाता है इस तेल को उसमे भी लगाया जाता है ।
  • जलने पर भी ये तेल उपयोगी होता है ।
  • किसी भी तरह के संक्रमित त्वचा रोग जैसे की एक्जिमा, सिफलिस इत्यादि इस सब में भी इस तेल का उपयोग होता है।
  • इन सब के अलावा इसे फटी एड़ी, बाहरी बवासीर, गुदा उदर आदि में भी इस्तेमाल करते है ।

How to use / कैसे उपयोग करे :-

  • रोगग्रस्त स्थान पर इस तेल को दिन में लगभग 4 बार लगाना होता है ।
  • ध्यान रहे की इस तेल को हमेशा स्नान करने के बाद हीं लगाए ।
  • रूई को इस तेल में भिगो कर फिर उसी के सहारे इसका उपयोग करे ।
  • आप चाहे तो तेल से लगे रूई को रोगग्रस्त स्थान पर रख कर उसे पट्टी भी कर सकते है ।

Side-effect / होने वाले दुष्प्रभाव  

  • कभी कभी इसे इस्तेमाल करने से skin पर rashes हो सकता है ।
  • कभी कभी इसे लगाने के बाद जलन भी महसूस हो सकती है ।
  • इसके मौखिक सेवन के गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

Leave a Comment